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परिचय


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बुधवार, 12 अक्टूबर 2016

गणितीय आगमन सिद्धांत

माखनलाल चतुर्वेदी की एक कविता है - "दीप से दीप जले" जिसकी प्रथम और अंतिम पंक्तियाँ हैं: 

सुलग-सुलग री जोत दीप से दीप मिलें
सुलग-सुलग री जोत! दीप से दीप जलें।

आप सोच रहे होंगे कि गणितीय आगमन सिद्धांत  (Principle of Mathematical Induction) का इस कविता से क्या संबंध है ! शीघ्र ही यह स्पष्ट हो जाएगा. मान लीजिए एक कतार में अनंत संख्या में दीप रखे हुए हैं. कल्पना कीजिए कि किसी भी एक दीप के जलना शुरू करते ही अगला दीप भी जलना शुरू कर देता है. इस स्थिति में यदि आप कतार में पहले स्थान पर रखे दीप को जलाते हैं, तो क्या सभी दीप स्वयं जल उठेंगे ? शायद आपका उत्तर भी "हाँ" होगा.

गणितीय आगमन सिद्धांत भी इसी व्यावहारिक प्रेक्षण पर आधारित है. मान लीजिए कि हमें सिद्ध करना है कि कोई कथन किसी भी प्राकृत संख्या n के लिए सत्य है. इसके लिए हम इस कथन को n = 1 के लिए सत्य सिद्ध करते हैं. पुनः हम सिद्ध करते हैं कि यदि यह कथन किसी स्वेच्छ संख्या n = k के लिए सत्य है, तो यह अगली संख्या k + 1 के लिए भी सत्य होता है. तब यह सिद्ध हो जाता है कि वह कथन सभी n के लिए सत्य है, क्योंकि n = 1 के लिए सत्य होने के कारण यह n = 2 के लिए सत्य होता है, फिर n = 2 के लिए सत्य होने के कारण n = 3 के लिए सत्य होता है, इसी प्रकार n = 4, 5, इत्यादि के लिए सत्य होता है.

इस सिद्धांत के विषय में विस्तार से जानने के लिए यह लेख पढ़ें: गणितीय आगमन सिद्धांत.

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