परिचय


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मंगलवार, 9 अगस्त 2016

क्या बिंदु अपरिभाषित है ?

ज्यामिति का आरंभ जिन तीन अवधारणाओं से होता है - वे हैं बिंदु, रेखा और समतल  की अवधारणाएँ. बिंदु क्या है ? बिंदु की क्या परिभाषा है ? इस प्रश्न का उत्तर प्रायः यह कहकर दिया जाता है कि बिंदु अपरिभाषित है. अर्थात, इसे परिभाषित नहीं किया जा सकता है. इसकी केवल कल्पना की जा सकती है या इसका केवल वर्णन किया जा सकता है. इसे क्यों नहीं परिभाषित किया जा सकता है ? - इस प्रश्न का उत्तर पाने से पहले हमें बिंदु का व्यावहारिक निरूपण समझना होगा.
एक पेंसिल की नोंक से कागज पर जो निशान बनता है, उसे हम बिंदु का एक निरूपण समझ सकते हैं. पेंसिल की नोंक जितनी पतली होगी, बिंदु का निरूपण उतना ही सटीक होगा. नीचे के चित्र में अलग - अलग मोटाई की नोंक वाले पेंसिल से बिंदु का निरूपण दिखाया गया है.
चित्र - 1: अलग - अलग पेंसिल से बिंदु का निरूपण

यदि हम और अधिक पतले नोंक वाले पेंसिल का प्रयोग करें, तो अंकित निशान का आकार और अधिक छोटा होगा. हम कुछ सीमा तक पेंसिल के नोंक को पतला बना सकते हैं और अत्यंत छोटे आकार का निशान कागज पर अंकित कर सकते हैं. परन्तु इससे छोटे निशान की कल्पना भी हम अपने मन में कर सकते हैं, भले ही हम उसे कागज पर अंकित न कर पाएँ. हम कितने भी छोटे आकार की कल्पना क्यों न करें - इस कल्पना का अंत नहीं होगा - हम निरंतर छोटे से छोटे निशानों की कल्पना करते चले जाएँगे. तब एक ही उपाय शेष रह जाता है - बिंदु को आकारहीन मान लेना. बिंदु का कोई आकार नहीं है. इस प्रकार यह दृश्य भी नहीं होना चाहिए. इसकी कोई लम्बाई या चौड़ाई भी नहीं हो सकती. तो क्या बिंदु को इस प्रकार परिभाषित किया जा सकता है ? - "जिसका कोई आकार नहीं हो और जिसकी लम्बाई या चौड़ाई नहीं हों, वही बिंदु है." परन्तु इस परिभाषा में "जिसका" शब्द का क्या तात्पर्य है ? लंबाई और चौड़ाई का क्या अर्थ है ? बिंदु की इस परिभाषा में समस्या यहीं पर है. वस्तुतः लम्बाई और चौड़ाई को बिंदु और रेखा की अवधारणा के बिना परिभाषित नहीं किया जा सकता है. ध्यान दें कि चित्र - 1 में दिखाए गए निशान बिंदु नहीं हैं. वे निशान केवल बिंदु को समझाने के लिए और व्यवहार में ज्यामिति समझने के लिए प्रयुक्त किए जाते हैं. गणित में हमें कहीं - न - कहीं से शुरूआत करनी होती है, और जहाँ से हम शुरुआत करते हैं, उसे परिभाषित नहीं किया जा सकता है, क्योंकि उसकी चर्चा पहली बार हो रही होती है. अतः हम ज्यामिति का आरंभ यह मान कर करते हैं कि हमें यह ज्ञात है कि बिंदु क्या है. इसी प्रकार, ज्यामिति में रेखा और समतल को भी प्राथमिक अवधारणा के रूप में ज्ञात माना जाता है. परन्तु बिंदु, रेखा और समतल के बीच अंतर्संबंधों को बताया जा सकता है. दो अलग - अलग बिंदु एक रेखा को पूर्णतः निर्धारित करते हैं. एक रेखा में अनंत बिंदु होते हैं. चित्र -2 देखें.

चित्र -2

इसी प्रकार तीन अलग - अलग बिंदु एक समतल को पूर्णतः निर्धारित करते हैं. एक समतल में अनंत रेखाएँ और अनंत बिंदुएँ होती हैं. नीचे का चित्र देखें.

चित्र -3



2 टिप्‍पणियां :

  1. अनंत का उपयोग सदियों से होता आया है। फिर भी हमारे द्वारा उसको अपरिभाषित कह देना कितना उचित है ? कहीं ऐसा तो नहीं कि सिर के बालों को गिनने का कोई औचित्य समझ में न आने के कारण हमारे पूर्वजों ने बालों को बिना गिने ही अनंत कह दिया हो ! रेगिस्तान में बैठकर के रेत के दानों को गिनने में आने वाली समस्या के कारण रेत के दानों को अनंत कह दिया हो या फिर रात के समय तारों की संख्या दिन-प्रतिदिन कम या ज्यादा दिखाई देने के कारण तारों को अनंत कह दिया हो। या फिर उस संख्या तक गिनती ही न आने के कारण उन सभी चीजों को अनंत कह दिया गया हो। जो एक नज़र में बहुत अधिक दिखाई देती हैं। बेशक अनंत होने का भ्रम कई कारणों की देन हो सकता है। परन्तु विज्ञान में भिन्न-भिन्न शब्दों के संयोग से अनंत के कई अर्थ निकलते हैं। इसके बाबजूद अनंत को अपरिभाषित ही कहा जाता है। परन्तु विज्ञान के प्रत्येक क्षेत्र में जहाँ-जहाँ अनंत का उपयोग होता है। उसके पीछे की वजह स्पष्ट होती है। आइये.. विज्ञान के भिन्न-भिन्न क्षेत्रों में अनंत को परिभाषित करतें हैं।

    कुछ उदाहरण :
    १. अंक गणित : अनिश्चित मान के लिए
    २. फलन गणित : मुख्यतः भागफल की प्रक्रिया द्वारा प्राप्त अपरिभाषित संख्या..
    ३. ज्यामिति में : किन्ही दो समान्तर रेखाओं का कटान बिंदु
    ४. रेखा गणित में : किसी बिंदु से गुजर सकने वाली रेखाओं की संख्या अथवा किसी रेखा को निर्मित करने में उपयुक्त बिन्दुओं की संख्या
    ५. मापन में : सर्वाधिक मान के लिए
    ६. गणना में : अधिकतम मान के लिए, अनगिनित (जिन्हें किसी कारणवश गिनना असंभव हो।)

    अनंत के अन्य अर्थ पढ़ने के लिए : http://www.basicuniverse.org/2013/04/blog-post_25.html

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