परिचय


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गुरुवार, 9 अप्रैल 2015

गणितज्ञ कैसे बनें ? पहली कड़ी : द्विपद प्रमेय (Binomial Theorem)

"गणितज्ञ कैसे बनें ?" गणितीय आलेखों की एक श्रृंखला है, जिसके अंतर्गत विविध गणितीय विषयों पर ऐसे लेख प्रस्तुत किये जाते हैं, जो पाठकों को ज्ञात गणितीय तथ्यों, परिणामों और सूत्रों को स्वयं खोजने के लिए क्रमबद्ध तरीके से प्रेरित करते हैं और जिनसे उनके अंदर गणितीय शोध की स्वाभाविक प्रवृति जागृत होती है.

यदि कोई वास्तविक संख्या (real number) $a$ दी हुई हों, तो इसके  $n$-वें घात $a^n$, जहाँ $n$ एक ॠणेतर (non-negative) संख्या है, का परिकलन आसानी से कर सकते हैं. इसके लिए हम $\underbrace{a \times \cdots \times a}_{n \text{बार}}$ का परिकलन करते हैं. उदाहरण के लिए, $5^2 = 5 \times 5 = 25$ और $(-2)^3 = (-2) \times (-2) \times (-2) = -8$. ध्यान रखें कि किसी शून्येतर (nonzero) वास्तविक संख्या $a$ के लिए $a^0$ का मान $1$ परिभाषित किया जाता है.

गुरुवार, 2 अप्रैल 2015

अभाज्य संख्याओं की अनंतता (Infinitude of Prime Numbers)

अभाज्य संख्याओं की परिभाषा से हम सब परिचित हैं.  एक स्वाभाविक जिज्ञासा होती है कि सबसे बड़ी अभाज्य संख्या कौन है या इनकी संख्या अनंत है. इस प्रश्न का उत्तर यूक्लिड (Euclid) की पुस्तक संख्या - IX में देखा जा सकता है, जहाँ उन्होंने सिद्ध किया है कि अभाज्य संख्याओं की संख्या अनंत है. उनका तर्क मोटे तौर पर इस प्रकार है: यदि अभाज्यों की एक परिमित सूची दी हुई हो, तो हम एक अन्य अभाज्य संख्या ज्ञात कर सकते हैं, जो इस सूची में नहीं हैं. नीचे के प्रमेय में हम इस तथ्य की स्पष्ट उपपत्ति देते हैं.

प्रमेय (यूक्लिड). अभाज्य संख्याओं की संख्या अनंत है.

उपपत्ति: 
मान लीजिए कि अभाज्य संख्याओं की संख्या परिमित है. इन अभाज्यों की सूची $p_1, p_2, \ldots , p_n$ बनाईये. अब एक धन पूर्णांक $m = p_1p_2\cdots p_n + 1$ परिभाषित कीजिये. क्योंकि $m > 1$, अंकगणित के मूलभूत प्रमेय के अनुसार, कम से कम एक अभाज्य $p$ धन पूर्णांक $m$ को अवश्य विभाजित करेगा. क्योंकि हमारे पास परिमित संख्या में अभाज्य संख्याएँ हैं, अतः $p$ इन्हीं अभाज्यों में से कोई एक अभाज्य होगा. परन्तु तब $p \mid p_1\cdots p_n$. क्योंकि $p \mid m$, इसलिए अवश्य ही $p \mid (m - p_1\cdots p_n)$, अर्थात $p \mid 1$, जो एक अंतर्विरोध है. अतः अभाज्य संख्याओं की संख्या परिमित नहीं हो सकती. इस प्रकार हमारी उपपत्ति पूर्ण होती है. 

क्योंकि किसी भी विषम धन पूर्णांक को $4n + 1$ या $4n + 3$ के रूप में व्यक्त किया जा सकता है, इसलिए विषम अभाज्य संख्याएँ भी इन रूपों में व्यक्त किये जा सकते हैं. एक स्वाभाविक प्रश्न उठता है कि क्या $4n + 1$ के रूप में या $4n + 3$ के रूप में व्यक्त किये जा सकने वाले अभाज्य संख्याओं की संख्या अनंत है. इस प्रश्न का उत्तर "हाँ" है | नीचे के प्रमेय में हम सिद्ध करेंगे कि $4n + 3$ के रूप में व्यक्त किये जा सकने वाले अभाज्य संख्याओं की संख्या अनंत है. परन्तु उससे पहले हम निम्नलिखित प्रमेयिका सिद्ध करेंगे.

प्रमेयिका. यदि दो या अधिक पूर्णांक $4n + 1$ के रूप के हों, तो उनका गुणनफल भी इसी रूप का होता है.

उपपत्ति: 

केवल $4n + 1$ के रूप वाले दो पूर्णांकों पर विचार करना पर्याप्त है. मान लीजिए $m_1 = 4m +1$ और $m_2 = 4n + 1$. तब $m_1m_2 = (4m + 1)(4n + 1) = 4(4mn + m + n) + 1$, जो अभीष्ट रूप में है.

प्रमेय. $4n + 3$ के रूप में व्यक्त किये जा सकने वाले अभाज्यों की संख्या अनंत हैं.
उपपत्ति: 
इस कथन को हम अंतर्विरोध द्वारा सिद्ध करेंगे. मान लीजिए कि $4n + 3$ के रूप में व्यक्त किये जा सकने वाले अभाज्य संख्याओं की संख्या परिमित हैं और ये अभाज्य $p_1, \ldots, p_k$ हैं. अब एक धनात्मक पूर्णांक 
\[m = 4p_1\cdots p_k - 1 = 4(p_1\cdots p_k - 1) + 3\]
परिभाषित कीजिए. ध्यान दीजिए कि $m \geq 3$. अतः $m$ किसी अभाज्य संख्या से विभाजित होगा. क्योंकि $m$ एक विषम संख्या है, अतः इसके सभी अभाज्य गुणनखंड विषम होंगे और ये सभी गुणनखंड या तो $4n + 1$ के रूप के होंगे या $4n + 3$ के रूप के होंगे. यदि सभी गुणनखंड $4n + 1$ के रूप के हों, तो उपरोक्त प्रमेयिका के अनुसार $m$ भी $4n + 1$ के रूप का होगा, जो सत्य नहीं है. अतः $m$ का कम से कम एक अभाज्य गुणनखंड $4n + 3$ के रूप का अवश्य होगा. क्योंकि हम यह मानकर चले थे कि $4n + 3$ के रूप में व्यक्त किये जा सकने वाले अभाज्य केवल $p_1,\ldots , p_k$ हैं, अतः $m$ का कम से कम एक अभाज्य गुणनखंड इन्हीं अभाज्यों में से कोई एक अभाज्य, मान लीजिए $p_1$, होगा. परन्तु तब क्योंकि $p_1 \mid 4p_1\cdots p_k$, इसलिए $p_1 \mid 4p_1\cdots p_k - m = 1$, जो एक अंतर्विरोध है. अतः ऐसे अभाज्यों की संख्या परिमित नहीं हो सकती. इस प्रकार हमारी उपपत्ति पूर्ण होती है.


उपरोक्त उपपत्ति की ही तरह इस तथ्य की उपपत्ति नहीं दी जा सकती है कि $4n + 1$ के रूप में व्यक्त किये जा सकने वाले अभाज्यों की संख्या अनंत हैं. इस कथन की उपपत्ति हम आगे के किसी अध्याय में देंगे. उपरोक्त दोनों कथन डिरिक्ले (Dirichlet) के निम्नलिखित प्रमेय की विशेष स्थिति है.

प्रमेय. यदि $a$ और $b$ असहभाज्य धन पूर्णांक हों, तो सामानांतर अनुक्रम
\[a, a+b, a+2b, a+3b, \ldots\]
अनंततः अनेक अभाज्य संख्याओं को आविष्ट करता है.

उपरोक्त प्रमेय के अनुसार, किन्हीं दो असहभाज्य धन पूर्णांकों $a$ और $b$ के लिए $a+nb$ के रूप में व्यक्त किये जा सकने वाले अभाज्य संख्याओं की संख्या अनंत होती हैं. इस प्रमेय की उपपत्ति यहाँ हम नहीं देंगे. इसकी उपपत्ति वैश्लेषिक संख्या सिद्धांत (Analytic Number Theory) के अंतर्गत किसी अध्याय में (इसी ब्लॉग में अन्यत्र) दी जाएगी.

इस विषय से संबंधित अन्य जानकारी के लिए मूल आलेख अभाज्य संख्याएँ देखें.

ध्यातव्य: इस विषय से संबंधित किसी भी प्रश्न या जिज्ञासा के लिए इस पृष्ठ पर टिप्पणी करें या ganitanjalii@gmail.com पर ई-मेल करें.

(चैत्र शुक्ल पक्ष, त्रयोदशी, वि. सं. 2072, वृहस्तपतिवार)
(चैत्र 12, राष्ट्रीय शाके 1937, वृहस्तपतिवार)
 

बुधवार, 1 अप्रैल 2015

इरेटोस्थिनीज़ की चलनी-विधि (The Sieve of Eratosthenes)

यदि एक धन पूर्णांक दिया हुआ हो, तो स्वाभाविक प्रश्न उठता है कि दी गई संख्या अभाज्य है या नहीं. यह निर्णय करना सैद्धांतिक रूप से संभव है. मान लीजिए दी गई संख्या $n$ है. इस संख्या के तुच्छ गुणनखंड $1$ और $n$ हैं. यदि हम $n$ कोई अतुच्छ गुणनखंड $a$ ज्ञात कर सके, तो $a \mid n$, और इस प्रकार $n$ एक संयुक्त संख्या होगी. यदि कोई भी अतुच्छ गुणनखंड (nontrivial factor) न हो, तो $n$ के केवल तुच्छ गुणनखंड (trivial factors) $1$ और $n$ होंगे और $n$ एक अभाज्य संख्या होगी. इस प्रकार किसी धन पूर्णांक $n$ की अभाज्यता (primality) की जाँच करने के लिए हमें $n$ से छोटी सभी संख्याओं से $n$ की विभाज्यता (divisibility) की जाँच करनी होगी. छोटी संख्याओं के लिए यह विधि आसान है, परन्तु बड़ी संख्याओं के लिए यह विधि व्यावहारिक सिद्ध नहीं होती. परन्तु इस विधि को थोड़ा दक्ष बनाया जा सकता है. इस विधि के अनुसार, हमें किसी धन पूर्णांक $n$ की अभाज्यता की जाँच करने के लिए केवल $\sqrt{n}$ की संख्याओं से $n$ की विभाज्यता की जाँच करना पर्याप्त होता है. यह तथ्य इस प्रेक्षण पर आधारित है कि यदि धन पूर्णांक $n$ अभाज्य नहीं हो, तो इसका कम से कम एक अतुच्छ गुणनखंड $\sqrt{n}$ से कम या इसके बराबर होगा. इसे हम निम्नलिखित प्रमेय के द्वारा स्पष्ट करते हैं:

प्रमेय. एक धन पूर्णांक $n \geq 2$ संयुक्त संख्या होती है यदि और केवल यदि यह $1$ से बड़ी किसी अभाज्य संख्या $p \leq \sqrt{n}$ से विभाज्य हो.

आइये, इसे एक उदाहरण की सहायता से समझें. मान लीजिए हमें $2017$ की अभाज्यता की जाँच करनी है. क्योंकि $44 < \sqrt{2017} < 45$,  इसलिए $44$ से छोटी सभी अभाज्य संख्याओं $2, 3, 5, 7, 11, 13, 17, 19, 23, 29, 31, 37, 41$ और $43$ से $2017$ की विभाज्यता की जाँच करना पर्याप्त है. हम आसानी से जाँच कर सकते हैं कि $2017$ उपरोक्त अभाज्य संख्याओं में से किसी भी संख्या से विभाज्य नहीं है. अतः $2017$ एक अभाज्य संख्या है. आइये, अब $2093$ की अभाज्यता की जाँच करें. क्योंकि $45 < \sqrt{2093} < 46$, इसलिए $45$ से छोटी सभी अभाज्य संख्याओं $2, 3, 5, 7, 11, 13, 17, 19, 23, 29, 31, 37, 41$ और $43$ से $2093$ की विभाज्यता की जाँच करना पर्याप्त है. हम देख सकते है कि यह $7$ से विभाज्य है, अर्थात $2093 = 7 \cdot 299$. अतः $2093$ अभाज्य नहीं है.

उपरोक्त विधि में हमने देखा कि किसी धन पूर्णांक $n$ की अभाज्यता जाँच करने के लिए हमें $\sqrt{n}$ तक की अभाज्य संख्याओं से ही $n$ की विभाज्यता की जाँच करनी होती है. फिर भी बड़ी संख्याओं के लिए यह विधि व्यावहारिक सिद्ध नहीं होती, क्योंकि $n$ के बड़े मानों के लिए $\sqrt{n}$ का भी मान बड़ा होता है, और तब हमें बहुत अधिक अभाज्य संख्याओं से $n$ की विभाज्यता की जाँच करनी होती है. किसी धन पूर्णांक $n$ की विभाज्यता की जाँच करने के लिए अभी तक कोई आसान विधि नहीं खोजी जा सकी है. परन्तु इस विधि से अधिक दक्ष ढेर सारी विधियाँ हैं, जिनकी चर्चा हम अगले अध्यायों में उपयुक्त स्थानों पर करेंगे.

आइये अब हम इरेटोस्थिनीज़ की चलनी विधि पर चर्चा करें. यह विधि परिमित संख्या में लिए गए धन पूर्णांकों के समुच्चय से अभाज्य संख्याओं को छाँटने की विधि है. यह विधि उपरोक्त विधि पर ही आधारित है. मान लीजिए हमें $100$ तक की अभाज्य संख्याएँ ज्ञात करनी है | हम निम्नलिखित प्रक्रिया दुहराते हैं :

चरण 1. दस क्षैतिज पंक्तियों में $1$ से $100$ तक की संख्या लिखें.
चरण 2. $1$ को काट दें, क्योंकि यह अभाज्य संख्या नहीं है.
चरण 3. क्योंकि $2$ अभाज्य संख्या है, इस पर घेरा लगाएँ और $2$ के अतिरिक्त इसके अन्य सभी गुणजों $2, 4, 6, 8, 10, \ldots$,  इत्यादि को काट दें.
चरण 4. अब अगली अभाज्य संख्या $3$ को घेर दें और इनके अन्य गुणजों को काट दें.
चरण 5. अगली अभाज्य संख्या $5$ को घेर दें और इनके अन्य गुणजों को काट दें.
चरण 6. पुनः अगली अभाज्य संख्या $7$ को घेर दें और इनके अन्य गुणजों को काट दें.
चरण 7. यह प्रक्रिया तब तक दुहराते रहें, जबतक कि सभी अभाज्य संख्याओं पर घेरा न लग जाएँ.

इस चरण के बाद हम देखते हैं कि हमें निम्नलिखित सारणी प्राप्त होती है, जिसमें वृत्ताकार घेरा के अंदर की सभी संख्याएँ अभाज्य हैं.

इरेटोस्थिनीज़ की चलनी विधि
इस प्रमेय की उपपत्ति और इस विषय से संबंधित अन्य जानकारी के लिए मूल आलेख अभाज्य संख्याएँ देखें.

ध्यातव्य: इस विषय से संबंधित किसी भी प्रश्न या जिज्ञासा के लिए इस पृष्ठ पर टिप्पणी करें या ganitanjalii@gmail.com पर ई-मेल करें.

(चैत्र शुक्ल पक्ष, द्वादशी, वि. सं. 2072, बुधवार)
(चैत्र 11, राष्ट्रीय शाके 1937, बुधवार)

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