प्राचीन भारत के
प्रसिद्द गणितज्ञों में गणितीय ग्रंथ लीलावती के रचयिता भास्कराचार्य
का महत्वपूर्ण स्थान है | लीलावती वास्तव में भास्कराचार्य रचित ग्रंथ सिद्धांत-शिरोमणि का ही एक भाग है | यह ग्रंथ गणित और ज्योतिष
विषय का महत्त्वपूर्ण ग्रंथ है और यह संस्कृत भाषा में काव्यात्मक शैली में
श्लोकबद्ध है | इस ग्रंथ में वर्णित
नियमों की व्याख्या करने के लिए भास्कराचार्य ने गद्य शैली में वासना नामक एक ग्रंथ लिखा | सिद्धांत-शिरोमणि के चार भाग हैं - लीलावती, बीजगणित, गोलाध्याय और ग्रहगणित | लीलावती में अंकगणित
(पाटीगणित) पर, बीजगणित में बीजगणित पर, गोलाध्याय में खगोल पर और
ग्रहगणित में ग्रहों की गति पर चर्चा की गई है | सिद्धांत-शिरोमणि के अतिरिक्त भास्कराचार्य ने एक और ग्रंथ करण-कुतूहल की रचना की थी, जिसमें पंचांग बनाने की विधियों पर चर्चा की गयी है | लीलावती पर कई टीकाएँ
लिखी जा चुकी हैं और देश-विदेश की कई भाषाओँ
में अनुवाद किये गए हैं |
बहुभिर्प्रलापैः किम् , त्रयलोके सचरारे। यद्किंचिद्वस्तु तत्सर्वम् , गणितेन् बिना न हि॥ हिंदी में उच्च - स्तरीय गणित - लेखन का एक उद्यम......
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शनिवार, 30 अगस्त 2014
भास्कराचार्य
सूचक शब्द :
अनिधार्य समीकरण
,
चक्रवाल विधि
,
बीजगणित
,
भास्कराचार्य
,
लीलावती
स्थान :
India
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