परिचय


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मंगलवार, 30 दिसंबर 2014

योज्य संख्या सिद्धांत : परिचय

योज्य संख्या सिद्धांत (Additive Number Theory) संख्या सिद्धांत (Number Theory) की एक शाखा है, जिसके अंतर्गत योज्य समुच्चयों (additive sets) और इनके योग-समुच्चयों (sumsets) का अध्ययन किया जाता है | योज्य समुच्चय किसी योज्य क्रमविनिमेय समूह (Additive Abelian Group), अर्थात एक ऐसा समूह, जिसमें योग की संक्रिया परिभाषित हो और यह संक्रिया क्रमविनिमेय हो, का उपसमुच्चय होता है | योज्य समुच्चय को आविष्ट करने वाले योज्य क्रमविनिमेय समूह को समावेशी समूह (Ambient Group) कहते हैं | उदाहरण के लिए, पूर्णांकों का समुच्चय $\mathbb{Z}$ एक योज्य क्रम विनिमेय समूह हैं और इनके उपसमुच्चय $\{1, 2, 3, 4\}$ और $\{p : p ~\text{एक अभाज्य संख्या है}~\}$ योज्य समुच्चय हैं | एक ही समावेशी समूह $G$ के दो या दो से अधिक योज्य समुच्चयों का योग - समुच्चय समूह $G$ के वैसे अवयवों का समुच्चय होता है, जिन्हें कुछ निश्चित प्रतिबंधों के अधीन योज्य समुच्चयों के अवयवों के योगफल के रूप में लिखा जा सकता है |
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