परिचय


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रविवार, 19 जुलाई 2015

गणितीय शब्दावलियों की व्याख्या-2

गणित में प्रयुक्त होने वाली कुछ शब्दावलियाँ

शंकु (cone) से हम सभी परिचित है. निर्देशांक ज्यामिति (co-ordinate geometry) में हम परवलय (parabola), दीर्घवृत्त (ellipse) और अतिपरवलय (hyperbola) का अध्ययन करते हैं. इन तीनों वक्रों को शांकव (conics) कहा जाता है, क्योंकि शंकु को किसी समतल (plane) द्वारा अलग अलग तरीके से प्रतिच्छेद करने पर ये वक्र प्राप्त होते हैं (नीचे का चित्र देखें). शांकव का अर्थ होता है - शंकु से उत्पन्न, ठीक वैसे ही जैसे पांडु से उत्पन्न महाभारत के पात्र पांडव और कुरु से उत्पन्न कौरव और मनु से उत्पन्न मानव. वास्तव में इन शब्दों की व्युत्पत्ति मूल शब्द में अण् प्रत्यय लगाने से हुई है. इस प्रकार शांकव = शंकु + अण्. 
समतल द्वारा शंकु को प्रतिच्छेद करने पर प्राप्त वक्र

इसी प्रकार ठोस ज्यामिति (solid geometry) में हम परवलयज (paraboloid), दीर्घवृत्तज (ellipsoid) और अतिपरवलयज (hyperboloid) का अध्ययन करते हैं. इन्हें शांकवज (conicoid) कहा जाता है, जिसे शांकव में ज प्रत्यय लगाने से प्राप्त होता, जिसका अर्थ होता है - (से) उत्पन्न या (से) जन्मा. इस प्रकार शांकवज का अर्थ हुआ शांकव से उत्पन्न, ठीक वैसे ही जैसे जल से उत्पन्न जलज या पंक (कीचड़) से उत्पन्न पंकज. वास्तव में शांकव को x-अक्ष के प्रति घूर्णन करने पर शांकवज की उत्पत्ति होती है. यदि हम परवलय को x-अक्ष के प्रति घूर्णन कराएँ, तो हमें परवलयज प्राप्त होगा. इसी प्रकार हम दीर्घवृत्तज और अतिपरवलयज प्राप्त कर सकते है.
यह वीडियो भी देखें : https://www.youtube.com/watch?v=BnWEI5o35G8

सोमवार, 6 जुलाई 2015

गणितीय शब्दावलियों की व्याख्या-1

आइए, गणित में प्रायः प्रयुक्त होने वाली कुछ शब्दावलियों की व्याख्या करें !

धनात्मक पूर्णांकों से हम सभी परिचित हैं. इन पूर्णांकों का समुच्चय {1, 2, 3,...} है. इसी प्रकार ऋणात्मक पूर्णांकों का समुच्चय {..., --3, -2, -1} है और पूर्णांकों का समुच्चय {..., -3, -2, -1, 0, 1, 2, 3, ...} है. कभी - कभी हम यह कहते है कि अमुक कथन शून्येतर पूर्णांकों के लिए सत्य है. इसका अर्थ है कि यह कथन शून्य को छोड़कर अन्य सभी पूर्णांकों के लिए सत्य है. ध्यान दें कि शून्येतर = शून्य + इतर. इतर का अर्थ होता है - (से) भिन्न और इस प्रकार शून्येतर का अर्थ हुआ- शून्य से भिन्न पूर्णांक संख्याएँ यानि धनात्मक और ऋणात्मक पूर्णांक संख्याएँ. इसी प्रकार ॠणेतर पूर्णांक का अर्थ होता है - जो पूर्णांक संख्या ऋण नहीं है, अर्थात शून्य और धनात्मक पूर्णांक संख्याएँ, धनेतर पूर्णांक संख्याओं का अर्थ भी इसी प्रकार परिभाषित है - शून्य और ऋणात्मक पूर्णांक संख्याएँ. आप देख सकते हैं कि गणितीय शब्दावलियों का निर्माण कुछ प्रत्ययों की सहायता से कितनी सुगमता से किया जा सकता है. किसी भी भाषा की शब्दावलियों को समझने के लिए उस भाषा के व्याकरण का ज्ञान आवश्यक है. इन उदाहरणों की सहायता से आप समझ गए होंगे कि गणित में दुरूह दिखने वाले हिंदी पारिभाषिक शब्द वास्तव में कितने आसान और अर्थपूर्ण है....आवश्यकता है तो व्याकरण के नियमों को जानने की.
अगले पोस्ट में कुछ और शब्दावलियों की व्याख्या की जाएगी.

शुक्रवार, 3 जुलाई 2015

त्रिघातीय समीकरण (Cubic Equation)

प्रस्तुत लेख में हम त्रिघातीय समीकरण पर विस्तार से चर्चा करेंगे. 

1. परिचय  

समीकरण
\begin{equation}\label{cubic}
ax^3 + bx^2 + cx + d = 0,
\end{equation}
जहाँ $a, b, c, d, e$ सम्मिश्र संख्याएँ (complex numbers) हैं और $a \neq 0$, के रूप के समीकरण को सम्मिश्र त्रिघातीय समीकरण (complex cubic equation) कहते हैं. यदि गुणांक $a, b, c, d, e$ वास्तविक संख्याएँ (real numbers) हों, तो इसे हम वास्तविक त्रिघातीय समीकरण (real cubic equation) कहते हैं.  कुछ त्रिघातीय समीकरण के उदाहरण नीचे दिए गए हैं.
\begin{align}\label{cubic1}
x^3 &=0\\ \label{cubic2}
2x^3 + 3x^2 -1 &= 0\\
-x^3 + 7x + 2 &= 0\\
x^3 + x^2 + 3x + 11 &= 0.
\end{align}
एक सम्मिश्र संख्या $x = \alpha$ त्रिघातीय समीकरण $(\ref{cubic})$ का हल (solution) या मूल (root) होता है यदि
\[a \alpha^3 + b \alpha^2 + c \alpha + d = 0. \]
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