परिचय


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रविवार, 21 अगस्त 2016

रचनीय संख्याओं का विलक्षण संसार

प्राचीन ग्रीसवासी ज्यामितीय रचनाओं में विशेष रुचि रखते थे. वे विशेषकर वैसी रचनाओं में रुचि रखते थे, जिनकी रचनाएँ केवल पैमाने (जिसपर केवल इकाई दूरी अंशांकित हों) और परकार की सहयता से किया जा सके. उन्हें समबाहु त्रिभुज, वर्ग, समपंचभुज, समषट्भुज इत्यादि की रचनाओं का ज्ञान था. उन्हें किसी कोण को समद्विभाजित करने का भी ज्ञान था. परन्तु, समसप्त्भुज की रचना कैसे की जाए या किसी कोण को कैसे समत्रिभाजित किया जाए - इनके बारे में उन्हें कोई जानकारी नहीं थी. इसके अतिरिक्त ज्यामितीय रचनाओं से संबंधित कुछ और भी समस्याएँ थीं, जो उनके लिए असाध्य थीं. जैसे कि किसी वृत्त के क्षेत्रफल के बराबर वर्ग की रचना या किसी घन के आयतन के दुगुने आयतन वाले घन की रचना, इत्यादि. इन समस्याओं ने गणितज्ञों को 2000 वर्षों तक उलझाए रखा. इन समस्याओं का समाधान 19वीं शताब्दी में संभव हो सका, जब इन ज्यामितीय समस्याओं को बीजगणितीय समस्याओं के रूप में परिवर्तित किया गया. वास्तव में उपरोक्त समस्याओं की रचनाएँ संभव नहीं है. अतः इन रचनाओं में मिली असफलता स्वाभाविक थी. बीजगणित के माध्यम से इन समस्याओं के अध्ययन के क्रम में दो नई प्रकार की संख्याओं का उद्गम हुआ - रचनीय संख्याएँ और अरचनीय संख्याएँ. प्रस्तुत लेख में हम इन विषयों पर विस्तार से चर्चा करेंगे.
चित्र - 1: वास्तविक संख्याओं का वर्गीकरण
वास्तविक संख्याओं को उनके लक्षणों के आधार पर कई वर्गों में वर्गीकृत किया जा सकता है. उदाहरण के लिए, प्राकृत संख्याओं को विभाज्यता के आधार पर सम (even) और विषम (odd) संख्याओं में, गुणनखंड के आधार पर अभाज्य (prime) और भाज्य (composite) संख्याओं में, परिमेयता के आधार पर परिमेय (rational) और अपरिमेय (irrational) संख्याओं में वर्गीकृत किया जा सकता है.  आइए, हम वास्तविक संख्याओं के एक अन्य लक्षण पर विचार करते हैं. यह लक्षण है - रचनीयता. इस लक्षण के आधार पर हम वास्तविक संख्याओं को दो प्रकार की संख्याओं में वर्गीकृत करते हैं - रचनीय संख्याएँ (constructible numbers) और अरचनीय संख्याएँ  (non-constructible numbers). जैसा कि नाम से ही स्पष्ट है - रचनीय संख्या का अर्थ है - वैसी संख्या जिसकी रचना की जा सके. रचना से हमारा तात्पर्य है - वास्तविक संख्या रेखा (real number line) पर किसी संख्या का ज्यामितीय निरूपण. इन संख्याओं की रचना हेतु हम केवल दो ज्यामितीय उपकरणों - पैमाना (ruler) और परकार (compass) का प्रयोग करेंगे. इस पैमाने पर केवल इकाई दूरी (unit length) और इसके पूर्णांकीय दूरी अंशांकित होंगे (चित्र - 2 देखें). सैद्धांतिक रूप से हम इस पैमाने को अनंत लम्बाई वाला मान सकते हैं. इस प्रकार रचनीय संख्याओं को हम निम्न प्रकार परिभाषित कर सकते हैं:

रचनीय संख्याएँ वैसी वास्तविक संख्याएँ हैं, जिनका ज्यामितीय निरूपण संख्या रेखा पर केवल उपरोक्त वर्णित पैमाना और परकार की सहायता से किया जा सके. वैसी संख्याएँ जो रचनीय संख्याएँ नहीं हैं, अरचनीय संख्याएँ कहलाती हैं.

मंगलवार, 9 अगस्त 2016

क्या बिंदु अपरिभाषित है ?

ज्यामिति का आरंभ जिन तीन अवधारणाओं से होता है - वे हैं बिंदु, रेखा और समतल  की अवधारणाएँ. बिंदु क्या है ? बिंदु की क्या परिभाषा है ? इस प्रश्न का उत्तर प्रायः यह कहकर दिया जाता है कि बिंदु अपरिभाषित है. अर्थात, इसे परिभाषित नहीं किया जा सकता है. इसकी केवल कल्पना की जा सकती है या इसका केवल वर्णन किया जा सकता है. इसे क्यों नहीं परिभाषित किया जा सकता है ? - इस प्रश्न का उत्तर पाने से पहले हमें बिंदु का व्यावहारिक निरूपण समझना होगा.

गुरुवार, 4 अगस्त 2016

अभिगृहीत...प्रमेय...उपप्रमेय...प्रमेयिका...???

गणित के उच्च-स्तरीय पाठ्य पुस्तकों को खोलते ही हमारा सामना कुछ विशिष्ट शब्दावलियों : अभिगृहीत (Axiom), प्रमेय (Theorem), उपप्रमेय (Corollary), प्रमेयिका (Lemma), प्रतिज्ञप्ति (Proposition), अनुमान (Conjecture), उपपत्ति (proof), परिभाषा (Definition),  इत्यादि से हमारा सामना होता है. यहाँ तक कि सातवीं - आठवीं कक्षा के छात्रों को भी ज्यामिति की पुस्तक में इन शब्दावलियों का सामना करना पड़ता है. यहाँ हम इन शब्दावलियों को परिभाषित करेंगे और इनके प्रयोगों के विषय में बताएँगे.

सोमवार, 1 अगस्त 2016

गणिताञ्जलि प्रतियोगिता 2016


गणिताञ्जलि प्रतियोगिता 2016

"गणिताञ्जलि" का उद्देश्य है: हिंदी में गणितीय लेखों के माध्यम से जन-सामान्य में गणित के प्रति रुचि जागृत करना, उन्हें गणित विषय से अवगत कराना और हिंदी में गणितीय अध्ययन - अध्यापन और लेखन की दिशा में उन्हें  प्रोत्साहित करना.

इस उद्देश्य को ध्यान में रखते हुए "गणिताञ्जलि" आगामी गणित दिवस सह रामानुजन - जयंती (22 दिसंबर) के उपलक्ष्य में "गणिताञ्जलि प्रतियोगिता 2016" का आयोजन कर रहा है. 

इस प्रतियोगिता के अंतर्गत "गणिताञ्जलि" पाठकों से गणितीय लेख आमंत्रित करता है. इस प्रतियोगिता में गणित में रुचि रखने वाला कोई भी व्यक्ति भाग ले सकता है. चयनित लेखों को पुरस्कृत किया जाएगा और इस वेबपृष्ठ पर प्रकाशित भी किया जाएगा.

लेख गणित के किसी भी विषय पर लिखकर भेजा जा सकता है - जैसे कि किसी गणितज्ञ की जीवनी, ज्यामिति का इतिहास, बीजगणित का इतिहास, गणित में भारत का योगदान, गणित क्या है ?, रैखिक समीकरणों का हल, त्रिभुजों का क्षेत्रफल, गुणा करने की आसान विधियाँ, वर्गमूल, घनमूल, वृत्तों के गुणधर्म, क्रमचय - संचय, अनुक्रम और श्रेणी, लघुगणक, गणित का अनुप्रयोग, प्रकृति में गणित, जादुई वर्ग, विशिष्ट प्रकार की संख्याएँ....इत्यादि. इन विषयों के अतिरिक्त प्रतिभागी गणित से संबंधित अपने रुचि के किसी भी विषय पर लेख लिखकर भेज सकते हैं. 

इस प्रतियोगिता से संबंधित नियम व शर्तें निम्नलिखित हैं:
  • लेख गणित विषय से संबंधित होना चाहिए. लेख का विषय निर्धारित नहीं किया गया है. पाठक लेख के विषय - चयन के लिए स्वतंत्र हैं.
  • लेख लेखक की मौलिक कृति होनी चाहिए और पूर्व प्रकाशित नहीं होना चाहिए. लेख अपने शब्दों में लिखा होना चाहिए. अन्यथा लेख अस्वीकृत कर दिया जाएगा.
  • लेख केवल हिंदी में देवनागरी लिपि में शुद्ध- शुद्ध लिखा होना चाहिए. लेख में व्याकरणिक अशुद्धियाँ नहीं होनी चाहिए.
  • लेख में प्रयुक्त पारिभाषिक शब्द हिंदी में होने चाहिए. यदि हिंदी में उपयुक्त पारिभाषिक शब्द उपलब्ध नहीं हों, तो अंग्रेज़ी शब्दों का प्रयोग किया जा सकता है. यदि अंग्रेज़ी पारिभाषिक शब्दों का प्रयोग किया गया है, तो इन्हें देवनागरी लिपि में लिखा जाना चाहिए और कोष्ठ में रोमन लिपि में भी लिखा जाना चाहिए. उदाहरण के लिए यह वाक्य देखें: टोपोलॉजी (Topology) गणित की एक शाखा है. 
  • लेख का शीर्षक ऐसा होना चाहिए, जिसे पढ़कर  ही लेख के विषय-वस्तु का कुछ - कुछ अनुमान हो जाए.
  • पाठकों को लेख लिखने से पहले किसी मानक निबंध - पुस्तक से पढ़कर यह जान लेना चाहिए कि एक अच्छा लेख कैसे लिखा जाता है.
  • लेख मुद्रित या स्व-हस्तलिखित हो सकते हैं. हस्तलिखित लेख स्पष्ट अक्षरों में लिखा होना चाहिए. लेख सादे कागज पर मुद्रित या स्व-हस्तलिखित होना चाहिए. मुद्रित लेख ज्यादा पसंद किए जाएँगे. 
  • लेख की शब्द - सीमा निर्धारित नहीं है. परन्तु लेख सामान्यतः 1000 - 5000 शब्दों के बीच हो सकते हैं.
  • लेख के अंत में लेखक अपना नाम, शैक्षणिक योग्यता या अन्य परिचयात्मक जानकारी, स्थायी पता, पत्राचार का पता और फोन या मोबाइल नं. (यदि हों), ई-मेल पता (यदि हों) तो अवश्य लिखें.
  • प्राप्त लेखों में से उत्तम कोटि के लेखों का चयन किया जाएगा. चयनित लेखों को इस वेबपृष्ठ पर लेखकों के नाम और परिचय के साथ गणित दिवस के दिन प्रकाशित किया जाएगा. चयनित लेखों को पुरस्कृत किया जाएगा. चयनित किए जाने वाले लेखों की संख्या और पुरस्कार के विषय में उपयुक्त समय पर सूचित किया जाएगा.
  • चयनित लेखों को संपादक द्वारा संशोधित और संपादित किया किया जा सकता है. परन्तु प्रकाशन से पूर्व संशोधित लेखों को लेखक के पास सहमति के लिए या किसी अन्य शुद्धिकरण के लिए भेजा जाएगा. यह कार्य ई-मेल के माध्यम से किया जाएगा. अल्प संशोधन की स्थिति में लेखक से इसकी सहमति  फोन या अन्य किसी माध्यम से ली जा सकती है. परन्तु प्रकाशन के बाद लेख में प्रस्तुत तथ्यों के लिए केवल उस लेख के लेखक ही उत्तरदायी होंगे.
  • लेख को एक पासपोर्ट आकार के फोटोग्राफ (यदि हों) के साथ डाक द्वारा निम्लिखित पते (हिंदी या अंग्रेजी ) पर भेजा जाना चाहिए:
        राज कुमार मिस्त्री
           कक्ष सं. - 218, गणित विभाग,
           हरीश चन्द्र अनुसंधान संस्थान,
           छतनाग मार्ग, झूँसी,
           इलाहाबाद - 211 019
           उत्तर प्रदेश  (भारत)

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         Raj Kumar Mistri
         Room No. 218, Department of Mathematics,
         Harish-Chandra Research Institute,
         Chhatnag Road, Jhunsi,
         ALLAHABAD - 211 019
         Uttar Pradesh (India)

  • लेख की प्रति (सॉफ्ट कॉपी) PDF, WORD, DOC या किसी भी सुविधाजनक फॉर्मेट में ई-मेल के माध्यम  से ganitanjalii@gmail.com पर भेजा जा सकता है. ई-मेल से भेजे जाने पर पुनः डाक द्वारा भेजने की आवश्यकता नहीं है.
  • एक लेखक केवल एक लेख ही भेज सकता है.  एक लेखक के एक से अधिक लेख प्राप्त होने की स्थिति में सभी लेख अस्वीकार कर दिए जाएँगे.
  • लेख प्राप्त होने की अंतिम तिथि 31 अक्टूबर 2016 है. (पहले यह 30 सितम्बर 2016 थी.)
  • चयनित लेखों की सूची उपयुक्त समय पर इस वेबपृष्ठ पर प्रकाशित किया जाएगा. लेखों के चयन में संपादक का निर्णय ही अंतिम निर्णय होगा.
  • किसी अन्य जानकारी के लिए लेखक से ई-मेल (ganitanjalii@gmail.com) के माध्यम से या फोन (+91-8677997395) के माध्यम से या "गणिताञ्जलि" के Facebook पृष्ठ (https://www.facebook.com/Ganitanjali/) पर संदेश भेजकर संपर्क किया जा सकता है. प्रतिभागी किसी जिज्ञासा के लिए नीचे भी टिप्पणी कर सकते हैं.
  • अद्यतन सूचनाओं के लिए इस वेबपृष्ठ और "गणिताञ्जलि" के Facebook पृष्ठ के संपर्क में बने रहें.
आयोजक: 
राज कुमार मिस्त्री
संपादक, गणिताञ्जलि !
गणित विभाग, हरीश चन्द्र अनुसंधान संस्थान, इलाहाबाद - 211 019, उ. प्र., भारत
ई-मेल:  ganitanjalii@gmail.com, itsrajhans@gmail.com

महेंद्र कुमार गुप्ता
गणित विभाग, भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान मद्रास , चेन्नई  - 600 036, तमिलनाडु,भारत
ई-मेल: mahendra14389@gmail.com

    $\ast\ast\ast$शुभकामनाओं के साथ !$\ast\ast\ast$
                                                       
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