परिचय


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भिन्नात्मक कलन - 21वीं शताब्दी का मुख्य विषय

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गणिताञ्जलि प्रतियोगिता 2016 में पुरस्कृत लेख
प्रकाशन-तिथि: 22 दिसंबर 2016
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लेखक: धर्मेंद्र सिंह 'हिन्दुस्तानी'
ग्राम - करसरी, जिला - कासगंज, उत्तर प्रदेश, पिन - 207124
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उच्च कक्षाओं में हमलोग कलन-शास्त्र (calculus) के अंतर्गत अवकलन (differentiation) और समाकलन (integration) की संकल्पना के विषय पढ़ते हैं. यदि $f(x)$ कोई वास्तविक मान बहु अवकलनीय फलन (many times differentiable function) हों, तो हम इसके प्रथम अवकलज $\frac{d}{dx}f(x)$, द्वितीय अवकलज $\frac{d^2}{dx^2}f(x), \cdots$, $n$-वाँ अवकलज $\frac{d^n}{dx^n}f(x)$, इत्यादि ज्ञात कर सकते हैं. इसी प्रकार यदि उपरोक्त फलन बहु समाकलनीय हो, तो इसके प्रथम समाकल $\int_0^{x}f(x_1)dx_1$, द्वितीय समाकल $\int_0^{x}\int_0^{x_2}f(x_1)dx_1dx_2, \cdots$, $n$-वाँ समाकल $\int_0^{x}\int_0^{x_n}\cdots \int_0^{x_2}f(x_1)dx_1dx_2\cdots dx_n$, इत्यादि ज्ञात कर सकते हैं.

इस प्रकार हम देखते हैं कि किसी फलन को $n$- बार अवकलित या समाकलित करना संभव हो सकता है. यहाँ पर n एक धनात्मक पूर्णांक है. अब प्रश्न यह उठता है कि क्या हम $n$ का कोई स्वेच्छ वास्तविक मान लेकर $\frac{d^n}{dx^n}f(x)$ को कोई निश्चित अर्थ प्रदान कर सकते हैं, ताकि यह अर्थ $n$ के धन पूर्णांक होने की स्थिति में पहले जैसा ही अर्थ व्यक्त करें, और कुछ बीजीय घातांकी नियम लागू हो सके ? उदाहरण के लिए, क्या हम $\frac{d^{1/2}}{dx^{1/2}}f(x)$ को कोई निश्चित अर्थ प्रदान कर सकते हैं, जिससे कि $\frac{d^{1/2}}{dx^{1/2}}\frac{d^{1/2}}{dx^{1/2}}f(x) = \frac{d}{dx}f(x)$ अर्थपूर्ण हों ? यह प्रश्न इस प्रेक्षण पर आधारित है कि $x^{1/2}x^{1/2} = x$. इसी प्रकार का प्रश्न हम समाकलन के लिए भी कर सकते हैं. भिन्नात्मक कलन (fractional calculus) में इसी प्रश्न पर विचार किया जाता है.

भिन्नात्मक कलन पारंपरिक कलन (classical calculus) के सिद्धांतों का व्यापकीकरण (generalization) है. यह व्यापकीकरण पूर्णांक $n$ को किसी समिश्र संख्या $ \alpha = a + ib$ से प्रतिस्थापित करने के लिए आवश्यक सिद्धांतों की व्याख्या करता है. यह विषय लैबनीज (Leibniz) या न्यूटन (Newton) के कलन - सिद्धांत जितना ही पुराना विषय है और विज्ञान तथा अभियांत्रिकी के क्षेत्रों में इसके महत्त्वपूर्ण अनुप्रयोग हैं. इसलिये भिन्नात्मक कलन एक आनंददायक विषय है.

लोपिताल (L’Hospital) द्वारा लैबनीज से पूछी गयी समस्या और भिन्नात्मक कलन का जन्म

लोपिताल को संबोधित 30 सितम्बर1695 के पत्र में लैबनीज ने अपूर्णांक कोटि के लिए $f(x)$ के अवकलन के व्यापीकरण की संभावना के विषय में पूछा था. तब लोपिताल ने पूछा कि यदि $n=1/2$ हो, तो $\frac{d^{1/2}}{dx^{1/2}}(x)$ का मान क्या होगा, अर्थात $x$ के अर्द्ध अवकलज (half-differentiatial) का मान क्या होगा ? इस संदर्भ में लैबनीज ने जबाब दिया - "यह एक विरोधाभास स्थिति की ओर ले जाता है जिसके द्वारा एक दिन महत्वपूर्ण परिणाम का जन्म होगा (It leads a paradox, from which one day useful consequence will be drawn)." यह विरोधाभास स्थिति इसलिए है क्योंकि यहाँ अवकलन प्रक्रिया के अपूर्णांक कोटि के लिए व्यापकीकरण के अनेक नियम हैं जो कि अलग-अलग परिणाम देते हैं. इस प्रकार हम कह सकते हैं कि लोपिताल द्वारा 30 सितम्बर 1695 को उठाई गयी समस्या से भिन्नात्मक कलन का जन्म हुआ. इस प्रकार हम 30 सितम्बर 1695 को भिन्नात्मक कलन की जन्म-तिथि कह सकते हैं. इस प्रकार भिन्नात्मक कलन न्यूटन और लैबनीज के परंपरागत कलन  की ही तरह तीन शताब्दी पुराना विषय है, फिर भी यह विषय शताब्दी के शुरू तक सुप्तावस्था / निष्क्रिय अवस्था में रहा. यह विषय वैज्ञानिक और अभियांत्रिकी समुदाय में भी कम लोकप्रिय रहा है. आज इसके बहुत -से अनुप्रयोग दिखने लगे हैं.  व्यंजक $\frac{d^{\alpha}}{dx^{\alpha}}f(x)$ प्रत्येक स्थिति ( जहाँ $\alpha$ एक स्वैच्छिक संख्या है, जो केवल पूर्णांक होने को बाध्य नहीं है) में भौतिकीय अर्थ रखते हैं, और आज हम भिन्नात्मक अवकल समीकरण (Fractional differential equation) पर आधारित निकाय/ तंत्र (system) की संकल्पना से परिचित हैं. बहुत-से गणितज्ञों, जैसे - ल्युविल (Liouville), रीमान (Riemann), वेये(Weye), फूरिये (Fourier), आबेल (Abel), लैकरोइक्स (Lacroix), ग्रूनवाल्ड (Grunwlad), लेकनोव (Lektnov), आदि ने भिन्नात्मक कलन के विकास में योगदान दिए हैं. यह विषय प्रकृति की वास्तविकता की सही तरह से व्याख्या करता है, इसलिए इस विषय को लोकप्रिय विषय के रूप में उपलब्ध बनाने के लिए विज्ञान और अभियांत्रिकी समुदाय को बताना होगा कि यह विषय प्रकृति के मूलभूत घटनाओं की अच्छी तरह से व्याख्या करने का एक नया मार्ग प्रशस्त करता है. यह कहना गलत नहीं होगा कि यह वह विषय है जिसे प्रकृति समझती है. प्रकृति से बात करने के लिए भिन्नात्मक कलन की भाषा कुशल व उत्तम है. पिछले तीन शताब्दियों में यह विषय गणितज्ञों तक ही सीमित रहा, परंतु पिछले कुछ वर्षो में यह अभियांत्रिकी, अर्थशास्त्र व विज्ञान आदि कई क्षेत्रों में प्रयुक्त किया गया है. हाल में कुछ नई संकल्पनाओं का अध्ययन किया गया है, जैसे - भिन्नात्मक विज्ञान सिद्धांत (Fractal science theory), भिन्नात्मक कलन में लाप्लास ट्रांसफार्म (Laplace transform in Fractional Calculus), इत्यादि.

मौलिक फलन के लिए भिन्नात्मक अवकलन सूत्र

यहाँ हम केवल एक उदाहरण की सहायता से भिन्नात्मक अवकलज की संकल्पना के विषय में बताना चाहेंगे. पाठक लेख के अंत में दिए गए संदर्भ-पुस्तकों से इस विषय पर अधिक जानकारी प्राप्त कर सकते हैं. यहाँ हम एकपदीय फलन $f(x) = x^k$, जहाँ $k \geq 1$, का भिन्नात्मक अवकलज (fractional derivative) परिभाषित करेंगे. सामान्य अवकलन की परिभाषा से हम जानते हैं कि
\[f'(x) =\frac{d}{dx}(x^k) = kx^{k-1}.\]
यदि $m$ कोई धनात्मक पूर्णांक हो, तो पुनरावृत्त अवकलन की सहायता से हम निम्नलिखित सूत्र प्राप्त करते हैं:
\begin{equation*}
f^{(m)}(x) = \frac{d^m}{dx^m}(x^k) =
\begin{cases}
\frac{k!}{(k-m)!}x^{k-m} &\text{यदि $m \leq k$,}\\
0 &\text{यदि $m > k $.}
\end{cases}
\end{equation*}

उपरोक्त सूत्र को ध्यान में रखते हुए और यह ध्यान देने पर कि $\Gamma(k + 1) = k!$, गामा फलन की सहायता से किसी धनात्मक वास्तविक संख्या $\alpha$ के लिए उपरोक्त फलन के भिन्नात्मक अवकलज के लिए निम्नलिखित सूत्र दिया जा सकता है:
\[\frac{d^\alpha}{dx^\alpha}(x^k) = \frac{\Gamma(k+1)}{\Gamma(k - \alpha + 1)}x^{k - \alpha},\]
जहाँ $k > -1$.
अब $ k =1$ और $\alpha = 1/2$ प्रतिस्थापित करने पर हमें $x$ का निम्नलिखित अर्ध अवकलज प्राप्त होता है:
\[\frac{d^{1/2}}{dx^{1/2}}(x) = \frac{\Gamma(2)}{\Gamma(3/2)}x^{1/2}=\frac{1}{\sqrt{\pi}/2}x^{1/2} = \frac{2}{\sqrt{\pi}}x^{1/2}\]
इस प्रक्रिया को दुहराने पर निम्नलिखित परिणाम प्राप्त होता है:
\[\frac{d^{1/2}}{dx^{1/2}}(\frac{2}{\sqrt{\pi}}x^{1/2})=\frac{2}{\sqrt{\pi}}\cdot\frac{\Gamma(3/2)}{\Gamma(1)}x^{0}=1,\]
क्योंकि $\Gamma(3/2) = \frac{\sqrt{\pi}}{2}$ और $\Gamma(1) = 1$. अतः हमें निम्नलिखित अपेक्षित परिणाम प्राप्त होता है:
\[\frac{d^{1/2}}{dx^{1/2}}\frac{d^{1/2}}{dx^{1/2}}(x) = \frac{d}{dx}(x).\]
ऋणात्मक पूर्णांक $-k$ के लिए गामा फलन अपरिभाषित है और हमें निम्नलिखित संबंध का प्रयोग करना पड़ता है:
\[\frac{d^\alpha}{dx^\alpha}(x^{-k}) = (-1)^\alpha \frac{\Gamma(k+\alpha)}{\Gamma(k)}x^{-(k + \alpha)},\]
जहाँ $k > 0$. इसी प्रकार भिन्नात्मक समाकल भी परिभाषित किया जा सकता है. यहाँ पर हम इसपर विस्तार से चर्चा नहीं करेंगे.


भिन्नात्मक कलन के अनुप्रयोग 

भिन्नात्मक कलन का हाल ही में अनुप्रयोग अभियांत्रिकी, विज्ञान, अनुप्रयुक्त गणित, जैव-प्रौद्योगिकी, वित्त व अर्थशास्त्र, आदि में किया गया है. हम जानते हैं कि पारंपरिक समाकलन (classical integration ) एक प्रकार से किसी वास्तविक मान फलन द्वारा निरूपित वक्र का किसी अंतराल पर उस वक्र के अधीन क्षेत्रफल ज्ञात करता है, जहाँ हम अंतराल के आदि बिंदु से अंत्य बिंदु तक फलन के सभी मानों पर विचार करते हैं. परंतु भिन्नात्मक समाकलन एक प्रकार से ऐसे वक्र के अधीन का क्षेत्रफल है जो आकृति / रूप बदलता रहता है. इसी प्रकार पारंपरिक कलन में अवकलज वक्र के किसी विशेष बिंदु पर प्रवणता (slope) है जबकि भिन्नात्मक कलन में भिन्नात्मक अवकलज (Fractional derivative) आकृति बदलने वाले वक्र का किसी विशेष बिंदु पर प्रवणता को निरूपित करता है.
चित्र-1

आज हम भिन्नात्मक कलन पर आधारित अनेक अभियांत्रिक तंत्र देखते हैं, जिनमें से कुछ को यहाँ संक्षिप्त रूप में बताया गया है. वे भिन्नात्मक लाप्लास चर (Fractional Laplace variable) पर आधारित हैं जो कि तब जनित होते हैं जब हम भिन्नात्मक अवकलन / समाकलन संकारक (fractional derivatives and fractional integration operators) का लाप्लास ट्रांसफार्म (Laplace transform) लेते हैं. भिन्नात्मक लाप्लास चर (Fractional Laplace variable) की सहायता से अनेक एनालॉग (analog) और डिजिटल (digital) इलेक्ट्रॉनिक तंत्र (electronic systems) को भिन्नात्मक अवकलन / समाकलन (fractional derivatives/integration) सिद्धांतों का प्रयोग करते हुए विकसित किये गए हैं. भिन्नात्मक अवकल समीकरण को हल करने हेतु लाप्लास विधि का प्रयोग किया जाता है. चित्र - 1 और चित्र - 2 एक चुम्बकीय उत्तोलन तंत्र (Magnetic Levitation system) को दर्शाता है जहाँ धात्विक गेंद हवा में तैर रही है जो कि चुम्बकीय कुंडली की धारा द्वारा नियंत्रित की जाती है और यह धारा गेंद के लिए त्रुटि संकेत के भिन्नात्मक अवकल और भिन्नात्मक समाकल के समानुपाती होता है. यह तंत्र उस प्रदर्शन को भी दर्शाता है कि इसे नियंत्रित करने में भिन्नात्मक कलन का प्रयोग किया गया है, जिससे हम कुशल नियंत्रण (efficient controls) प्राप्त कर रहे हैं.
चित्र-2

इन दोनों चित्रों - चित्र - 1 और चित्र - 2 की तुलना करने पर हम देखते हैं कि प्रथम स्थिति में तैरती गेंद की स्थिति धीरे-धीरे नियंत्रक के वोल्टेज उत्पादन की ज्यावक्रीय (sinusoidal) कमांड का पालन कर रही है. ( ज्यवाक्रीय एक प्रकार का $\sin$ wave है जिसको $x(t)=A_{max}\sinθ$, से निरूपित किया जाता है, जहाँ $θ=2πft$ है. यहाँ $f=$आवृत्ति, $t=$ समय है.) जबकि दूसरी स्थिति में नियंत्रक का वोल्टेज उत्पादन गंभीर रूप से अस्थिर है. इसे "शोर" या "विघ्न" (noise) कहा जाता है, परंतु यही शोरयुक्त आउटपुट भिन्नात्मक कलन आधारित तंत्र में अनुपस्थित है. हम एक ही इलेक्ट्रॉनिक्स का उपयोग कर रहे हैं और केवल अंकीय संकेत प्रक्रमक [Digital Signal Processor (DSP)] का कार्यक्रम बदल रहे हैं - पहली स्थिति में हम नियंत्रण के लिए पारंपरिक कलन का उपयोग कर रहे हैं और दूसरी स्थिति में नियंत्रण के लिए भिन्नात्मक कलन का उपयोग कर रहे हैं. भिन्नात्मक कलन के माध्यम से बेहतर कुशल नियंत्रण (efficient controls) का कारण यह है कि fractional differ-integral operator अंतर्निहित स्मृति (inherent memory) रखते हैं. तंत्रों में यह स्मृति अपने अतीत के अनुभव के आधार पर गेंद की स्थिति को नियंत्रित करने के लिए काम करती है. इसलिए यह fractional differ-integration एक आदर्श (अर्थात कम-से-कम त्रुटिरहित) परिणाम देता है. जबकि चिरसम्मत अवकलन (classical differentiation) एक बिंदु - प्रकृति को दर्शाता है जो कि स्मृति नहीं रखता है और बिना पिछले अनुभव के साथ तत्काल कार्य करता है.
चित्र-3
इस प्रकार दूसरी स्थिति में यंत्र का चालन संकेत (maneuvering signal) तत्क्षण बहुत उच्च होता जा रहा है और अगले ही पल में फिर से बहुत कम हो रहा है और बार-बार यही प्रक्रिया दोहराई जा रही है जो कि तंत्र में कुछ शोर (noise) परिलक्षित करती है. हम निष्कर्ष निकालते हैं कि दूसरी स्थिति में नियंत्रक इस गेंद पर नियंत्रण करने और तैरती अवस्था में रखने का पूरा-पूरा प्रयास कर रहा है जबकि पहली अवस्था में नियंत्रक क्रिया (controller action) सरल और निर्विघ्न (smooth and effort-less) है. इस प्रकार हम देख सकते हैं कि भिन्नात्मक कलन आधारित तंत्र में नियंत्रण क्रिया पारंपरिक कलन की अपेक्षा कम प्रयास लेती है. इसलिए भिन्नात्मक कलन आधारित तंत्र में नियंत्रण क्रिया बेहतर और कुशल (better and efficient) है. चित्र - 3 नियंत्रण वोल्टेज और गेंद की स्थिति का सी.आर.ओ. ग्राफ ( CRO traces) के लिए विस्तार से प्रयोगात्मक रिकॉर्ड देता है. यहाँ एक ही डीसी मोटर की गति नियंत्रित करने के लिए हमने पारंपरिक कलन और भिन्नात्मक कलन का प्रयोग किया है. चित्र - 4 डीसी मोटर - गति के नियंत्रण तंत्र की पूरे सेट-अप की है.
चित्र-4
चित्र - 5 आर्मेचर वोल्टेज और धारा का रिकॉर्ड देता है, जबकि यहाँ डीसी मोटर को पारंपरिक कलन द्वारा नियंत्रित किया गया है. प्रायोगिक परिणाम के अनुसार आर्मेचर वोल्टेज ($V$) और आर्मेचर धारा ($I$) का गुणनफल $VI=W=231.07$ वाट है जो डीसी मोटर के आर्मेचर हेतु इनपुट शक्ति है जबकि यहाँ मोटर 1000 rpm (चक्कर प्रति मिनट) से घूम रही है. चित्र - 6 में एक ही मोटर उसी गति से अर्थात 1000 rpm से घूम रही है, लेकिन भिन्नात्मक कलन द्वारा नियंत्रित की जाती है. इस स्थिति में डीसी मोटर के आर्मेचर हेतु 181.61 वाट इनपुट शक्ति की आवश्यकता होती है. अर्थात इस प्रकार 1000 rpm की गति पर एक डीसी मोटर को चलाने में पारंपरिक कलन आधारित नियंत्रण प्रणाली भिन्नात्मक कलन आधारित नियंत्रण प्रणाली की तुलना में 17.3% (49.46 वाट) अधिक शक्ति लेती है. यह एक संकेत है कि भिन्नात्मक कलन का उपयोग करके हम ईंधन - दक्षता (Fuel Efficiency) प्राप्त कर रहे हैं. आशा है कि भविष्य में उद्योग जगत इस नए गणित को ईंधन कुशल नियंत्रण प्रणाली बनाने के लिए प्रयुक्त करेंगे.

चित्र-5



चित्र-6















इस प्रकार यह विज्ञान और अभियांत्रिकी के छात्रों के लिए भिन्नात्मक कलन जानने के लिये एक प्रेरणा है. कई प्रयोग स्मृति आधारित गतिशीलता का प्रमाण देते हैं, जैसे- श्यान-प्रत्यास्थ ( श्यानता (viscocity) किसी तरल का वह गुण होता है जो तरल पर लगे बाहरी बल का विरोध करता है जिससे कि तरल अपनी वर्त्तमान आकृति अथवा अवस्था को विकृत न होने दे. प्रत्यास्थता (elasticity) पदार्थों के उस गुण को कहते हैं जिसके कारण उस पर बाह्य बल लगाने पर उसमें विकृति (deformation) आती है परन्तु बल हटाने पर वह अपनी मूल अवस्था में आ जाता है.) गुण वाले पदार्थ, परावैद्युत विश्रांति (dielectric relaxation) (उन कुचालक पदार्थों को परावैद्युत (dielectric) कहते हैं जिनके अन्दर विद्युत क्षेत्र पैदा करने पर या जिन्हें विद्युत क्षेत्र में रखने पर वे ध्रुवित हो जाते हैं), अति संधारित्र (super capacitor) का चार्ज होना , डिस्चार्ज होना, आदि जहां हम भिन्नात्मक कलन का प्रयोग करते हैं.

इस प्रकार भविष्य में विज्ञान और अभियांत्रिकी के क्षेत्र में भिन्नात्मक कलन के अनुप्रयोग की अपार संभावनाएँ हैं.

संदर्भ
  1. Shantanu Das. Functional Fractional Calculus, 2nd Ed., Springer-Verlag, 2011.
  2. Shantanu Das. Kindergarten of Fractional Calculus, Unpublished.
  3. http://shantanudaslecture.com/
  4. https://en.wikipedia.org/wiki/Fractional_calculus
चित्र - स्रोत: इस लेख के सभी चित्र संदर्भ पुस्तक [2] से लेखक की अनुमति से लिए गये हैं. इन चित्रों के किसी भी प्रकार से प्रयोग की अनुमति नहीं है.


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